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26 January (Happy Republic Day) Kavita Poem in Hindi गणतन्त्र दिवस की कविता

26 जनवरी के लिए कविता – 26 January Republic Day Kavita Poem in Hindi, गणतन्त्र दिवस पर कविता, बच्चो के लिए 26 जनवरी की कविता :- आओ तिरंगा फहराये’, आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये; अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये। अपना 71वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे; देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।

26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,

भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था,

मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था,

थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी,

था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।

विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है,

पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।

इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये,

थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

26 January Republic Day 2021 Poem in Hindi

नील गगन में बड़ी शान से, आज तिरंगा फहराया

भारत का गणतंत्र अनूठा, सारे जग को बतलाया!

पराधीन भारत माता ने, जाग के ली अंगडाई थी

वीरों की टोली की टोली , शीश चढाने आयी थी

आज़ादी की जंग चली जब, देख फिरंगी घबराया

भारत का गणतंत्र अनूठा, सारे जग को बतलाया !

हाथ तिरंगा तान के सीना, बढ़ते थे जब बलिदानी

भारत माँ की आज़ादी को, जान की भी दी कुर्वानी

आज़ादी के मतवालों ने, इसे देश में लहराया

भारत का गणतंत्र अनूठा, सारे जग को बतलाया!

शत शत नमन है उन वीरों को, आज़ादी थी दिलवाई

फांसी के फंदे पर झूले, सीने पर गोली खाई

कितने अत्याचार सहे थे, जेलों में जब ठूसवाया

भारत का गणतंत्र अनूठा, सारे जग को बतलाया!

जाति धर्म का भेद न, सबको समता का अधिकार है

मौके सबको मिले बराबर, कोई नहीं लाचार है

अनुपम सविधान है अपना, जिसको हमने अपनाया

भारत का गणतंत्र अनूठा, सारे जग को बतलाया !

वोट डालकर सभी बनाते, भारत की सरकार यहाँ

जनता है सर्वोच्च यहाँ पर, नेता चौकीदार यहाँ

जब जनता ने चाहा, सत्ता में बदलाव सहज आया

भारत का गंणतंत्र अनूठा, सारे जग को बतलाया!

26 January Poem in Hindi 2021

मत घबराओ, वीर जवानों

मत घबराओ, वीर जवानों

वह दिन भी आ जाएगा।

जब भारत का बच्चा बच्चा देशभक्त बन जाएगा।।

कोई वीर अभिमन्यु बनकर ,

चक्रव्यू को तोड़ेगा

कोई वीर भगत सिंह बनकर अंग्रेजो के सिर फोढेगा।।

धीर धरो तुम वीर जवानों ,

मत घबराओ वीर जवानों

वह दिन भी आ जायेगा

जब भारत का बच्चा बच्चा देशभक्त बन जाएगा।।

कलकल करती गंगा यमुना ,

जिसके गुण ये गाती हैं

भारत की इस पुण्य धरा में,

अपना गुंजार सुनती हैं।।

आज तिरंगे के रंगों को फीका नहीं होने देगे

इस तिरंगे की शान के लिए ,

अपना सर्वस्व लूटा देगे।।

अब मत घबराओ वीर शहीदों ,

मत घबराओ वीर जवानों

वह दिन भी आ जायेगा ,

जब भारत का बच्चा बच्चा देशभक्त बन जाएगा।।

वीर अमर शहीदों की कुर्बानी को,

कोई भुला ना पाएगा

जब अत्याचार बढ़ेगा धरती पर,

एक महापुरुष आ जायेगा

मत घबराओ वीर जवानों

जब भारत का बच्चा बच्चा देशभक्त बन जाएगा।।

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26 January Poem in Hindi 2021 (गणतंत्र दिवस पर कविता)

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है|

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है|

जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है|

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है|

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है|

जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है|

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है|

जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है||

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Best Poems on Republic Day 26 January 2021 Kavita in Hindi

तेरी जिंदगी से बहुत दूर चले जाना है,

फिर न लौट कर इस दुनिया में आना है,

बस अब बहुत हुआ,

अब किसी का भी चेहरा इस दिल में कभी नहीं बसाना है,

तुम्हारी जिंदगी में अब मैं नहीं,

तुम्हारी जिंदगी में अब कोई और सही,

पर मेरे दिल में तुम हमेशा रहोगे,

मेरा अधूरा ख्वाब बनकर, मेरे हमनशीं,

न कर मुझे याद करके मुझपर और एहसान,

ऐसा न हो मुझे पाने की तमन्ना में,

चली जाए तेरी जान,

मैं भी कोशिश करूँगा भुलाने की तुझे,

नहीं तो हो जाऊँगा तेरे नाम पर कुर्बान ,

हसरतें दिल में दबी रह गयी,

तुझे पाकर भी जिंदगी में कुछ कमी रह गयी,

आँखों में तड़प और दिल में दर्द अब भी है,

न जाने तेरे जाने के बाद भी,

आँखों में नमी रह गयी,

मन करता है जो दर्द है दिल में,

बयां कर दूँ हर दर्द तुझसे,

अब ये दर्द छुपाए नहीं जाते,

लेकिन नहीं कह सकता कुछ तुझसे,

क्योंकि दिलो के दर्द दिखाए नहीं जाते!

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी पर कविता (26 January Poem In Hindi 2021)

भारत देश हमारा है यह

हमको जान से प्यारा है

दुनिया में सबसे न्यारा यह

सबकी आंखों का तारा है

मोती हैं इसके कण- कण में

बूँद- बूँद में सागर है

प्रहरी बना हिमालय बैठा

धरा सोने की गागर है

भूमि ये अमर जवानों की है

वीरों के बलिदानों की

रत्नों के भंडार भरे हैं

गाथा स्वर्णिम खानों की

सत्य, अहिंसा, शांति बाँटता

इसकी शान तिरंग़ा है

गोद खेलती नटखट नदियाँ

पावन यमुना- गंगा है

चंदन की माटी से महके

मातृभूमि को वंदन है

कोटि-कोटि भारतवालों का

सुंदर सा यह नंदन है…

26 January Kavita Republic Day Best Short Poem in Hindi 2021

वतन हमारा ऐसे न छोर पाए कोई,

वतन हमारा ऐसे न छोर पाए कोई,

रिश्ता हमारा ऐसा ना तोड़ पाए कोई,

दिल है हमारे एक है, एक है हमारी जान,

दिल है हमारे एक है, एक है हमारी जान,

हिन्दुस्तान हमारा है हम है इसकी शान ||

बच्चों के लिए गणतंत्र दिवस पर कविता हिंदी में

मोह निंद्रा में सोने वालों, अब भी वक्त है जाग जाओ,

इससे पहले कि तुम्हारी यह नींद राष्ट्र को ले डूबे,

जाति-पाती में बंटकर देश का बन्टाधार करने वालों,

अपना हित चाहते हो, तो अब भी एक हो जाओ,

भाषा के नाम पर लड़ने वालों,

हिंदी को जग का सिरमौर बनाओ,

राष्ट्र हित में कुछ तो बलिदान करो तुम,

इससे पहले कि राष्ट्र फिर गुलाम बन जाए,

आधुनिकता केवल पहनावे से नहीं होती है,

ये बात अब भी समझ जाओ तुम,

फिर कभी कहीं कोई भूखा न सोए,

कोई ऐसी क्रांति ले आओ तुम,

भारत में हर कोई साक्षर हो,

देश को ऐसे पढ़ाओ तुम||

26 January Happy Republic Day Poetry in Hindi

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है|

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है|

जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है|

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है|

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है|

जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है|

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है|

जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है||

26 January Kavita in Hindi

देखो 26 जनवरी है आयी, गणतंत्र की सौगात है लायी।

अधिकार दिये हैं इसने अनमोल, जीवन में बढ़ सके बिन अवरोध।

हर साल 26 जनवरी को होता है वार्षिक आयोजन,

लाला किले पर होता है जब प्रधानमंत्री का भाषन।

नयी उम्मीद और नये पैगाम से, करते है देश का अभिभादन,

अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट पर अर्पित करते श्रद्धा सुमन,

2 मिनट के मौन धारण से होता शहीदों को शत-शत नमन।

26 January Republic Day Short Poem in Hindi 2021

सौगातो की सौगात है, गणतंत्र हमारा महान है,

आकार में विशाल है, हर सवाल का जवाब है,

संविधान इसका संचालक है, हम सब का वो पालक है,

लोकतंत्र जिसकी पहचान है, हम सबकी ये शान है,

गणतंत्र हमारा महान है, गणतंत्र हमारा महान है।

गणतंत्र दिवस कविता (Republic Day Poem In Hindi)

यह मेरा आजाद तिरंगा

लहर लहर लहराए रे

भारत माँ मुस्काए तिरंगा

लहर लहर लहराए रे!!

इस झंडे का बापू जी ने

कैसा मान बढ़ाया है

लाल किले पर नेहरू जी

ने यह झंडा फहराया!!

माह जनवरी छब्बीस को हम

सब गणतंत्र मनाते

और तिरंगे को फहरा कर,

गीत ख़ुशी के गाते!!

26 January Republic Day Long Poem in Hindi 2021 for School Students

हम गणतंत्र भारत के निवासी, करते अपनी मनमानी,

दुनिया की कोई फिक्र नहीं, संविधान है करता पहरेदारी।।

है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना;

न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी,

एक तरफ विदेशी हमलों की मार,

दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात,

पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी,

विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी,

एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात,

छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस।

1857 की क्रान्ति आजादी के संघर्ष की पहली कहानी थी,

जो मेरठ, कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली और अवध में लगी चिंगारी थी,

जिसकी नायिका झांसी की रानी आजादी की दिवानी थी,

देश भक्ति के रंग में रंगी वो एक मस्तानी थी,

जिसने देश हित के लिये स्वंय को बलिदान करने की ठानी थी,

उसके साहस और संगठन के नेतृत्व ने अंग्रेजों की नींद उड़ायी थी,

हरा दिया उसे षडयंत्र रचकर, कूटनीति का भंयकर जाल बुनकर,

मर गयी वो पर मरकर भी अमर हो गयी,

अपने बलिदान के बाद भी अंग्रेजों में खौफ छोड़ गयी|

उसकी शहादत ने हजारों देशवासियों को नींद से उठाया था,

अंग्रेजी शासन के खिलाफ एक नयी सेना के निर्माण को बढ़ाया था,

फिर तो शुरु हो गया अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का सिलसिला,

एक के बाद एक बनता गया वीरों का काफिला,

वो वीर मौत के खौफ से न भय खाते थे,

अंग्रेजों को सीधे मैदान में धूल चटाते थे,

ईट का जवाब पत्थर से देना उनको आता था,

अंग्रेजों के बुने हुये जाल में उन्हीं को फसाना बखूबी आता था|

खोल दिया अंग्रेजों से संघर्ष का दो तरफा मोर्चा,

1885 में कर डाली कांग्रेस की स्थापना,

लाला लाजपत राय, तिलक और विपिन चन्द्र पाल,

घोष, बोस जैसे अध्यक्षों ने की जिसकी अध्यक्षता,

इन देशभक्तों ने अपनी चतुराई से अंग्रेजों को राजनीति में उलझाया था,

उन्हीं के दाव-पेचों से अपनी माँगों को मनवाया था|

सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग को गाँधी ने अपनाया था,

कांग्रेस के माध्यम से ही उन्होंने जन समर्थन जुटाया था,

दूसरी तरफ क्रान्तिकारियों ने भी अपना मोर्चा लगाया था,

बिस्मिल, अशफाक, आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे,

क्रान्तिकारियों से देशवासियों का परिचय कराया था,

अपना सर्वस्व इन्होंने देश पर लुटाया था,

तब जाकर 1947 में हमने आजादी को पाया था|

एक बहुत बड़ी कीमत चुकायी है हमने इस आजादी की खातिर,

न जाने कितने वीरों ने जान गवाई थी देश प्रेम की खातिर,

निभा गये वो अपना फर्ज देकर अपनी जाने,

निभाये हम भी अपना फर्ज आओ आजादी को पहचाने,

देश प्रेम में डूबे वो, न हिन्दू, न मुस्लिम थे,

वो भारत के वासी भारत माँ के बेटे थे|

उन्हीं की तरह देश की शरहद पर हरेक सैनिक अपना फर्ज निभाता है,

कर्तव्य के रास्ते पर खुद को शहीद कर जाता है,

आओ हम भी देश के सभ्य नागरिक बने,

हिन्दू, मुस्लिम, सब छोड़कर, मिलजुलकर आगे बढ़े,

जातिवाद, क्षेत्रवाद, आतंकवाद, ये देश में फैली बुराई है,

जिन्हें किसी और ने नहीं देश के नेताओं ने फैलाई है,

अपनी कमियों को छिपाने को देश को भरमाया है,

जातिवाद के चक्र में हम सब को उलझाया है|

अभी समय है इस भ्रम को तोड़ जाने का,

सबकुछ छोड़ भारतीय बन देश विकास को करने का,

यदि फसे रहे जातिवाद में, तो पिछड़कर रह जायेंगे संसार में,

अभी समय है उठ जाओं वरना पछताते रह जाओगें,

समय निकल जाने पर हाथ मलते रह जाओगे,

भेदभाव को पीछे छोड़ सब हिन्दुस्तानी बन जाये,

इस गणतंत्र दिवस पर मिलजुलकर तिरंगा लहराये।।

गणतंत्र दिवस पर कविता 2021

हम गणतंत्र भारत के निवासी, करते अपनी मनमानी,

दुनिया की कोई फिक्र नहीं, संविधान है करता पहरेदारी।।

है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना;

न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी,

एक तरफ विदेशी हमलों की मार,

दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात,

पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी,

विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी,

एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात,

छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस।

26 January Kavita Republic Day Poem in Hindi

जब सूरज संग हो जाए अंधियारों के साथ

तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है।

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में

तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है।

जब देश को खतरा हो गद्दारों से

तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है।

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का

तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है।

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में

तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है।

जब नारी खुद को असहाय पाए

तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है।

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश

तो फिर सुभाष का आना जरूरी है।

जब सीधे तरीकों से देश न बदले

तब विद्रोह जरूरी है।

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